रचनाएं

उनके साहित्यिक

काम

उनकी कृतियों को मोटे तौर पर तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है


1. अपने प्रारंभिक काम के दार्शनिक अधिकांश इस श्रेणी में आता है। वह शिक्षा के साथ-साथ पेशे से एक दार्शनिक के रूप में (वह उन्हें किया जा रहा है राजा के 'दार्शनिक साथी' में से एक में विभिन्न पदों पर छतरपुर के महाराजा की अदालत में काम किया,)।


2. साहित्यिक निबंध -वह द्विवेदी और शुक्ल युग के सबसे प्रमुख हिंदी आलोचक में से एक है। 20 वीं सदी के प्रारंभिक आधा हिन्दी साहित्य के स्वर्ण युग था। उन्होंने कहा कि 'महावीर प्रसाद द्विवेदी', 'आचार्य रामचंद्र शुक्ल' आदि थे।


3. हास्य व्यंग्य - इनमें उनके कार्यों में सबसे प्रसिद्ध शामिल हैं जो उनके जीवन के बाद के हिस्से में आए थे। उनकी आत्मकथा किसी भी भाषा में स्व-व्यंग्य के बेहतरीन उदाहरणों में से एक है।

बाबू गुलाबराय

रचनाएं

ठलुआ क्लब फिर निराशा क्यों

साहित्यकारों के विचार ‘‘पहली ही भेंट में उनके प्रति मेरे मन में जो आदर उत्पन्न हुआ था, वह निरंतर बढ़ता ही गया। उनमें दार्शनिकता की गंभीरता थी, परंतु वे शुष्क नहीं थे। उनमें हास्य-विनोद पर्याप्त मात्रा में था, किंतु यह बड़ी बात थी कि वे औरों पर नहीं, अपने ऊपर हँस लेते थे।’’ —राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ‘‘बाबूजी ने हिंदी के क्षेत्र में जो बहुमुखी कार्य किया, वह स्वयं अपना प्रमाण है। प्रशंसा नहीं, वस्तुस्थिति है कि उनके चिंतन, मनन और गंभीर अध्ययन के रक्त-निर्मित गारे से हिंदी-भारती के मंदिर का बहुत सा भाग प्रस्तुत हो सका है।’’ —पं. उदयशंकर भट्ट ‘‘आदरणीय भाई बाबू गुलाब रायजी हिंदी के....

मेरी असफलताएँ

हिंदी साहित्य में जीवनियाँ बहुत कम हैं, जीवनियों में आत्म जीवनियाँ बहुत कम, आत्म जीवनियों में हास्य मात्रा बहुत कम और हास्य में साहित्यिक अथवा बौद्धिक हास्य बहुत कम। इसलिए बाबू गुलाब राय की पुस्तक ‘मेरी असफलताएँ’ अपना एक विशेष महत्त्व रखती है, क्योंकि इसमें एक सुलझे हुए और सुपठित व्यक्ति का आत्मचरित विनोद के प्रकाश से आलोकित होकर सामने आया है। आत्मचरित लिखने की प्रेरणा अंततः एक प्रकार के परिष्कृत अहंकार से ही मिलती है। पर बाबू गुलाब राय की विनोदप्रियता स्वयं अपनी ओर उन्मुख होकर उस अहंकार को कहीं भी उभरने नहीं देती। भूमिका में बाबू गुलाब.....

मन की बातें

मनुषय के अध्यन का सबसे प्रकृति और रुचिकर विषय है मनुष्य। विज्ञानं की उन्नति के दोनों में मनुष्य ने कोरी की उस लड़के की भांति जो अपने भाइयों की गिनती करते समय.....

जीवन पथ

संसार की भांति वर्तमान शिक्षा पद्धिति भी गुण-दोष मय है| हमारे वर्तमान शिक्षा में जहाँ बहुत से गुण है वहां कुछ दोष भी है। उसमे सबसे बड़ी कमी ये है की बिद्यार्थियों की निति और जीवन सम्बन्धी समस्याओं से अछूता-सा रखा जाता है। जहाँ शिक्षा हमारे विद्यार्थियों के मस्तिष्क को। ....

भारतीय संस्कृति की रूप रेखा

पा गा पाए संस्कृतियों का सम्मिश्रण २३ है । उनकी भक्ति में जाति-पांति का बन्धन नहीं है वह सबके लिये सुलभ हैं । जाति-पांति के बन्धन जो बीच मे खड़े हो गये थे उनम बेष्णव लोग कछ चौथिल्य ले भ्राये । महात्मा गांधी का प्रिय गीत. जिसके रचयिता नरसी महता हैं वैष्णवी मनोवृति का अच्छा दिग्ददान कराता है । वेष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ पराई जाणे रे पर दू खे उपकार करे तो ये मन श्रभिमान न. झ्राणे रे । सकल लोक मां सहुने बन्दे निन्दां न करे केनी रे । इस प्रकार वैष्णव भावना भक्ति से भर पूर श्ौर सेवा-परायण थी केवल शान्त लोग ही पदु बलि के समथक हू । ....

अध्ययन और अस्वाद

‘अध्ययन और आस्वाद’ बाबू गुलाबराय के साहित्यिक निबन्धों का संग्रह है। पुस्तक में संकलित निबन्धों में बाबू गुलाबराय के विस्तृत अध्ययन की एक पूरी झाँकी के दर्शन होते हैं। संग्रह के सभी निबन्ध आलोचनात्मक हैं। कुछ सैद्धान्तिक आलोचना से सम्बन्ध रखते हैं और कुछ व्यावहारिक। सैद्धान्तिक और साहित्यिक एवं इतिहास से सम्बन्धित निबन्धों में अध्ययन की बात अधिक है और व्यावहारिक आलोचना में अध्ययन के साथ आस्वाद का भी पुट है। अध्ययन और आस्वाद गुलाबराय जी की आलोचना के मूल स्तम्भ हैं और यही उनकी विशेषताएँ भी हैं।...

कुछ उथले कुछ गहरे

आत्माभिव्यक्ति चाहे मनुष्य की मूल प्रेरणा ना हो किन्तु वह मनुष्य की मूलतम प्रेरणा 'अहम् ' से ग्रन्थित अवश्य है और इसी कारण वह अपना विशेष महत्व रखती है। इसी को तुलसीदास जी ने स्वान्तः सुखाय कहा है और इसी की प्रेरणा से उन्होंने राखुनाथ - गाथा गए है।....

जीवन रश्मियाँ

यद्यपि 'राम - कृपया कछु दर्लभ नाही ' में मुझे पूर्ण विशवास है , तथापि राम कृपा के लिए जो साधना और अनन्यता चाहिए उनका मुझमे अपेक्षाकृत अभाव है। अपने शरीर की वर्तमान स्थिति को देखता हुआ मुझे बहुत कम आशा है की मैं कोई और ....

मेरे निबंध

प्राचीन काल में प्रायः कवी और नाटककार अपनी कृति के आरम्भ में स्वयं अपना और अपनी रचना का परिचय दे देते थे। यदि मैं भी उस प्रथा का पालन करू तो कम से कम मेरे प्राचीनतावादी मित्र , जो लकीर के फ़क़ीर कहलाने वाले अपना गौरव समझते है ....

राष्ट्रीयता

वर्तमान भारत का लोक कल्याण राज्य है। लोक-कलयाण और लोक - मंगल की सदभावना और सदाशयता होते हुए भी जनहित के कार्यों में उतनी सफलता नहीं मिल रही है जितनी की प्रयत्नों को देखते हुए अपेक्षित है....

शांति धर्म

बहुत से लोग ज्ञान और क्रिया में बड़ा भेद समझा करते है। उनके मत से अधिक ज्ञानवान पुरुष की क्रिया - प्रयाण नहीं होते और कृत - बुद्धि लोग बहुत समय मनन में वव्वय नहीं करते। बहुत से साक्षर पंडित जन ....

IMG-OUR
उनके नाम पर स्कूल स्मारक

IGM-AVATAR
श्री गुलाब राय मोंटेसरी स्कूल बरेली

कक्षा केजी से 5 वीं करने के लिए। यह स्कूल, दिल्ली सीबीएसई बोर्ड से सम्बद्ध है।

IGM-AVATAR
श्री गुलाब राय मोंटेसरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल बरेली

कक्षा 6 वीं से 12 वीं करने के लिए। यह स्कूल, दिल्ली सीबीएसई बोर्ड से सम्बद्ध है।

IGM-AVATAR
श्री गुलाब राय इंटर कॉलेज बरेली

कक्षा 6 वीं से 12 वीं करने के लिए। यह स्कूल, इलाहाबाद यूपी बोर्ड से सम्बद्ध है।